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राजस्थान के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी

राजस्थान के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी




  • अर्जुनलाल सेठी (1880-1941)- जयपुर में 1907 जयपुर मेवर्धमान विधालय की स्थापना की जिसमे क्रांतिकारीयों की प्रशिक्षण दिया जाता है | राजस्थान में सर्वप्रथम राजनैतिक चेतना को जन्म देने वाले क्यक्ति थे | जोरावर सिंह बारहट व प्रताप सिंह बारहट ने इन्ही से प्रशिक्षण लिया था | 1941 में अजमेर में ख्वाजा की दरगाह में इनकी मृत्यु हो गई |
  • विजय सिंह पथिक (1882-1954)- बुलंदशहर उ.प्र.- मूल नाम भूपसिंह | राजस्थान में किसान आन्दोलन के जनक और बिजोलिया के सफल संचालक विजय सिंह पथिक थे | उन्होंने राजस्थान सेवा संघ (1919) और सेवा समिति (1915) की स्थापना की | पथिक जी ने वर्धा से राजस्थान केसरी और अजमेर से नीव राजस्थान व तरुण राजस्थान नामक पत्रिकाओं का सम्पादन किया | वाट आर द इण्डियन स्टेट्स पथिक जी की चर्चित रचना है |
  • केसरी सिंह बारहट (1872-1941) देवपुरा गाँव , शाहपुरा (भीलवाडा)- उपनाम-राजस्थान केसरी | बारहट जी ने 1903 में दिल्ली दरबार जाते हुए महाराणा फतेहसिंह को चेतवनी रा चुंगट्या नाम से वीर भारत सभा के माध्यम से डिंगल में 13 सोरठे लिखकर स्वाभिमान जगाया | 1910 में स्थापित वीर भारत सभा के माध्यम से राजपूत जमींदारों में सामजिक सुधार का प्रयास किया | अपने पुत्र प्रताप सिंह की शहादत का समाचार सुनकर उन्होंने कहा की ‘ मुझे ख़ुशी है की भारत माता का पुत्र उसकी मुक्ति के लिए शहीद हो गया |
  • जोरावरसिंह बारहट (1883-1939) शाहपुरा (भीलवाडा)- उपनाम- राजस्थान का चन्द्रशेखर | ये केशरी सिंह बारहट के छोटे भाई थे | दिल्ली के महान क्रांतिकारी मास्टर अमीरचंद के प्रमुख सहयोगी रहे | इन्होने वायसराय लॉर्ड हार्डिंग के जुलुस पर 23 दिसम्बर 1912 को बम फैंका तथा इसके बाद भूमिगत हो गये और कभी पकड़ नहीं आये | इन्होने वर्द्धमान विधालय में शिक्षा ग्रहण की थी |
  • प्रताप सिंह बारहट (1893-1918) शाहपुरा (भीलवाडा)- ये केशरी सिंह बारहट के पुत्र थे || ये लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंकने में सहायक थे | इन्हें पकड़कर बरेली जेल में डाल दिया गया , क्रांतिकारीयों के भेद उगलवाने के लिए चार्ल्स क्लीवलैंड ने इन्हें घोर यातनाये दी और कहा “तुम्हारी माँ रोती है “ उन्होंने जवाब दिया –“मै अपनी माँ को चूप कराने के लिए हजारों माँ की नहीं रुला सकता |” इन्ही यातनाओ के कारण बरेली जेल में 27 मई 1918 को शहीद हो गये |
  • सागरमल गोपा (1900-1946) जैसलमेर – इन्होने जैलसमेर में सर्वहितकारी वाचनालय की स्थापना की | इन्होने जवाहरसिंह के तानाशाही शासन के विरुद्ध जैसलमेर में गुंडाराज और आजादी के दीवाने पुस्तके लिखी | 3 अप्रैल 1946 को इन्हें जैलसमेर जेल में जिन्दा जला दिया | गोपाल स्वरूप पाठक आयोग ने इसे आत्महत्या करार दिया |
  • मोतीलाल तेजावत (1887-1963)कोल्यारी (उदयपुर)- 1920 में चित्तौड के मात्रीकुण्डिय स्थान से एकी आन्दोलन की शुरुआत कर भीलों में राजनैतिक जागृति पैदा की | इन्होने वनवासी संघ की स्थापना की | उपनाम-आदिवासियों का मसीहा , बावजी, मेवाड़ का गांधी |
  • भोगीलाल पंड्या (1998-1981) – सीमलवाडा (डूंगरपुर) – उपनाम वागड़ के गांधी ‘वागड़ सेवा मंदिर ‘ नामक संस्था के संस्थाक भोगीलाल पंड्या ने 1944 ई. में डूंगरपुर प्रजामंडल की स्थापना की | इन्होने सेवा संघ संस्था की स्थापना की | इन्हें 1975 में पद्म-विभूषण से अलकृत किया गया |
  • गोकुलभाई भट्ट (1898-1974) – उपनाम- राजस्थान के गांधी | भट्टजी ने 1939 में सिरोही प्रजामंडल की स्थापना की | भट्ट जी राजस्थान प्रवेश कांग्रेस और खाड़ी ग्रामोद्योग आयोग के पहले अध्यक्ष थे | इन्होने बिनोबा भावे के भूदान आन्दोलन में भाग लिया \
  • हीरालाल शास्त्री (1899-1974) – जोबनेर (जयपुर ) – राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री थे | इन्होने निवाई (टोंक) में वनस्थली गाँव में ‘जीवन कुटीर ‘ संस्था स्थापित की | इन्होने 1936 में शांताबाई शिक्षा कुटीर की स्थापना की , जो अब वनस्थली विद्यापीठ के नाम से प्रसिद्ध है | इन्होने ‘प्रत्यक्ष जीवन शास्त्र’ नामक आत्मकथा और ‘प्रलय प्रतीक्षा नमो-नम:’ गीत की रचना की |
  • जयनारायण व्यास (1899-1963) – जोधपुर उपनाम- लोकनायक, धूंन का धनी, लक्कड़ और कक्कड़, शेर-ए-राजस्थान तरुण राजस्थान के व्यवस्थापक रहे और मुम्बई में अखण्ड भारत पत्र निकाला | इन्होने राजस्थानी भाषा का प्रथम समाचार पत्र आगीबाण प्रकाशित किया इन्होने पोपाबाई री पोल और मारवाड़ की अवस्था पुस्तिकाए प्रकाशित की | व्यास जी दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री चुने गये |
  • माणिक्यलाल वर्मा (1897-1969)- बिजौलिया (भीलवाडा)- 1938 ई. में इन्होने मेवाड़ प्रजामंडल की स्थापना की | 1934 में इन्होने सागवाड में खांडलोई आश्रम की स्थापना की | इन्होने मेवाड़ का वर्तमान शासन नामक पुस्तक और पैछीडा नाम प्रसिद्ध गीत लिखा |
  • जमनलाल बजाज (1889-काशी का बॉस (सीकर) – उपनाम – गांधी के पांचवे पुत्र उन्होंने अंग्रेजो के द्वारा प्रदान की गई राय बहादुर की उपाधि को लौटा दिया | 1927 में इन्होने जयपुर में चरखा संघ की स्थपना की |1938 में ये जयपुर प्रजामंडल के अध्यक्ष बने |
  • रामनारायण चौधरी नीम का थाना (सीकर)- नया राजस्थान और तरुण राजस्थान समाचार पत्रों के सम्पादन रहे | बेंगु और बिजोलिया को उनकी गतिविधियों केलिए आर्थिक सहायता प्रदान करते थे |
  • बलवंत सिंह मेहता (उदयपुर) – 1938 में मेवाड़ प्रजामंडल के प्रथम अध्यक्ष बने | मूल संविधान और हस्ताक्षर करने वाले पहले राजस्थानी थे |
  • हरिभाऊ उपाध्याय (ग्वालियर)- कर्मस्थली – अजमेर –ण हटुंडी (अजमेर) में गांधी आश्रम की स्थापना की | अजमेर राज्य के प्रतम मुख्यमंत्री थे |
  • राव गोपाल सिंह खरवा खरवा (अजमेर)- वीर भारत सभा नामक गुप्त सैनिक संघठन बनाने में सहयोग दिया | 1915 में सशस्त्र क्रान्ति करने की योजना बनाई इसलिए इन्हें टॉडगढ़ के किले में नज़र बन्ध कर दिया गया |
  • अमरचन्द बांठिया (बीकानेर)– अमरचन्द बांठिया को 1857 की क्रान्ति का भामाशाह कहते है | ग्वालियर राज्य के राजकोष प्रभारी बांठिया ने क्रांति के समय ग्वालियर का राजकोष व अपनी निजी सम्पति लक्ष्मीबाई और तांत्या टोपे को दे दी | 22 जून 1857 की उन्हें अंग्रेजो ने फांसी पर चढ़ा दिया | बांठिया 1857 की क्रांति के राजस्थान के प्रथम शहीद थे |
  • विशम्भर दयाल बहरोड़ (अलवर)– 1912 में हार्दिग्स बमकाण्ड में शामिल होने के कारण फांसी की सजा सुनाई किन्तु वे जेल से फरार हो गये | 1931 में उन्हों गिरफ्तार कर लिया गया और कठोर यातनाये दी जिससे वे जेल में शहीद हो गये |



  • छगनराज चौपासनीवाला (जोधपुर)- 26 जनवरी 1932 में जोधपुर की थानमंडी में पहली बार तिरंगा फहराया | इन्होने मारवाड़ हितकारिणी सभा यूथ लीग, बाल भारत सभा, सिविल लिबर्टीज यूनियन, पीपुल्स एसोसिएसन आदि संस्थाओं की स्थापना व संचालन किया |
  • स्वामी केशवानंद (सीकर)- कर्मस्थली- बीकानेर रियासत उपनाम-शिक्षा संत | बचपन का नाम बीरमा था | उदासी मत के गुरु कुशलनाथ से दीक्षित होने के बाद केशवानन्द कहलाये | संगरिया (हनुमानगढ़) में ग्रामोत्थान विद्यापीठ की स्थापना की और राष्ट्र भाषा हिंदी का प्रचार-प्रचार किया |
  • चन्दनमल बहड (चुरू) – चुरू के धर्मस्तूप पर तिरंगा फैराया | बीकानेर एक दिग्दर्शन पुस्तिका के माध्यम से बीकानेर रियासत के अत्याचारों को उजागर किया |
  • मोहनलाल सुखाडिया नाथद्वार (राजसमन्द)- आधुनिक राजस्थान के निर्माता सुखाडिया ने 17 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहकर राजस्थान में सर्वाधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने गौरव प्राप्त किया |
  • बाबा नरसिंह दास (नागौर)- सेठ नरसिंह दास अग्रवाल आन्दोलनकारियों की आर्थिक सहायता किया करते थे | 1921-22 में जब वेद गांधीजी के सम्पर्क में आये तो अपनी सारी सम्पति उनको अर्पित कर बाबा नरिसंह दास के नाम से प्रसिद्ध हुए |